Baghwani Faslon me Samekit Rog-Keet Prabandhan

By S.K Singh

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प्रथम खण्ड
१. उद्यानिक पफसलों में रोग नियंत्राण
२. पोषण प्रबन्धन द्वारा उद्यानिक फसलों में रोग नियंत्राण
३. उद्यानिक रोगों का रासायनिक नियंत्रण
४. बोर्डो मिश्रण एवं बोर्डो पेस्ट उद्यानिक फसलों के लिए वरदान
५. कृषि (शस्य) क्रियाओं द्वारा उद्यानिक रोगों का नियंत्राण
६. उद्यानिक रोगों का जैविक विधियों द्वारा नियंत्राण
७. ट्राइकोडर्मा : रोगों के प्रबन्धन हेतु प्रकृति का उपहार
८. एकीकृत (समेकित) नाशकजीव प्रबन्धन (इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट)
९. कृषि रसायन के सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी
१०. कृषि रसायनों के छिड़काव एवं भुरकाव के समय ध्यान देने योग्य बातें
द्वितीय खण्ड
११. फलों के प्रमुख रोग एवं प्रबंधन
१२. केला की प्रमुख बीमारियाँ एवं प्रबन्धन
१३. मखाना एवं सिंघाडा के प्रमुख रोग एवं प्रबन्धन
१४. सब्जियों के प्रमुख रोग एवं प्रबंधन
१५. आलू में रोग प्रबन्धन
१६. बाढ के बाद फल वृक्षों एवं सब्जियों की खेती में पौधा संरक्षण : ध्यान देने योग्य बातें
१७. कन्द मूल फसलों के रोग एवं प्रबन्धन
१८. फूलों के प्रमुख रोग एवं प्रबन्धन
१९. मसाला फसलों में समेकित रोग प्रबन्धन
२०. औषधीय एवं सगन्ध पौधों में समेकित रोग प्रबन्धन
२१. पान में समेकित कीट-व्याधि प्रबन्धन
२२. बीज जनित रोगों का समेकित प्रबंधन
२३. उद्यानिक फसलों में दैहिक विकार एवं प्रबन्धन
२४. उद्यानिक फसलों के प्रमुख पुष्पी पादप परजीवी एवं प्रबन्धन
२५. मशरूम के प्रमुख रोग एवं प्रबन्धन
तृतीय खण्ड
२६. उद्यानिक फसलों में कीट प्रबन्धन : एक परिदृश्य
२७. पादप एवं पादप उत्पाद : प्रभावी एवं सुरक्षित कीट नियंत्राक
२८. फलों के प्रमुख कीटों का प्रबन्धन
२९. लीची एवं आम में समेकित कीट प्रबन्धन
३०. फल मक्खियों का समेकित प्रबन्धन
३१. केला एवं नारियल के प्रमुख कीट एवं प्रबंधन
३२. मखाना एवं सिंघाडा की खेती में कीट प्रबन्धन
३३. सब्जियों में समेकित नाशककीट प्रबन्धन
३४. कन्दमूल फसलों में समेकित कीट प्रबन्धन
३५. फूलों में समेकित कीट प्रबन्धन
३६. औषधीय एवं सगंध फसलों में कीट प्रबन्धन
३७. मशरूम के प्रमुख कीट एवं प्रबन्धन
३८. चूहे : समस्या एवं निदान
चतुर्थ खण्ड
३९. मिट्‌टी में छिपे गुप्त शत्रुओं (सूत्राकृमियों) से उद्यानिक फसलों को बचायें
४०. केला एवं सब्जियों में सूत्राकृमि का प्रबन्धन
४१. मसाला, औषधीय एवं संगन्ध फसलों में समेकित सूत्राकृमि प्रबन्धन
पंचम खण्ड
४२. उद्यानिक फसलों में खरपतवारनाशी दवाओं का प्रयोग
४३. सब्जियों में खरपतवारों का प्रबन्धन
षष्टम खण्ड
४४. पुराने बागों का जीर्णोधर
४५. फल वृक्षों में फल एवं फलन संबंधी समस्याएँ एवं समाधान
४६. उद्यानिक फसलों में जैव उर्वरकों की महत्ता एवं उपयोग
४७. जैविक खाद : उपलब्धता, गुणवत्ता एवं उपयोगिता
४८. वर्मी कम्पोस्ट : समृद्ध खेती का विकल्प

Details

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“बागवानी फसलों में समेकित रोग-कीट प्रबन्धन” में बागवानी की लगभग सभी महत्त्वपूर्ण समस्याओं के समाधान पर इस प्रकार से प्रकाश डाला गया है कि किसान बागवानी से सम्बन्धित अधिकांश समस्याओं का निराकरण स्वयं कर सकें। प्रस्तुत पुस्तक में नाशकजीवों एवं विकारों के नियंत्रण हेतु समेकित (एकीकृत) प्रबन्धन पर विशेष महत्व दिया गया है। इस पुस्तक में 51 से ज्यादा आलेख सम्मिलित किये गये हैं। सभी प्रमुख बागवानी फसलों में प्रमुख रोग, कीट, सूत्रकृमि, खरपतवार एवं विकार के समेकित प्रबन्धन पर आलेख सम्मिलित किये गये हैं। इसके अतरिक्त अन्य बागवानी विषयों पर भी सामयिक आलेख यथा पुराने बागों का जीर्णेंाद्धार, बाग की देखभाल, पुष्पी पादप परजीवियों का प्रबन्धन, यन्त्रों का रखरखाव, कृषि रसायनों के सम्बन्ध में जानने योग्य बातंे, फलों का फटना, फलों का झड़ना, पोषक तत्व प्रबन्धन, बागवानी में मधुमक्खी पालन, कीटनाशक रसायनों से मधुमक्खी एवं अन्य मित्र कीटों की सुरक्षा, पौधा स्वास्थ्य चिकित्सालय इत्यादि शामिल किये गये हैं। किसान को उसके उत्पाद का लाभकारी मूल्य मिले इसके लिए आवश्यक है कि रोग, कीट, सूत्रकृमि, खरपतवार एवं विकार द्वारा होने वाली हानि से बागवानी फसलों को बचाया जाय। जीवनाशकों एवं विकार द्वारा हानि 30 से लेकर शत-प्रतिशत तक होती है। उपरोक्त हानि को आसानी से रोका जा सके, जिसके लिए अनेक फसल सुरक्षा तकनीक उपलब्ध हैं। बागवानी फसलों में नाशकजीवों (रोग, कीट, सूत्रकृमि एवं खरपतावर) और विकार द्वारा होने वाली हानि को यदि कम कर दिया जाए तो उपज के साथ-साथ गुणवत्ता में भी भारी वृद्धि की जा सकती है, जिसकी वजह से हमारा भोजन संतुलित एवं प©ष्टिक होगा। इस विषय पर अभी तक उच्च स्तरीय विषय सामग्री राष्ट्रभाषा हिन्दी में उपलब्ध नहीं थी, अतः इसकी आवश्यकता को देखते हुए, उत्पादकों की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए तथा राष्ट्रभाषा हिन्दी की सेवा भावना से प्रेरित होकर इस रचना को हिन्दी में लिखने का प्रयास किया गया है।

Additional Info

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Author S.K Singh
ISBN 9788172338152
Publisher Scientific Publishers
Year of Publication 2012

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